संस्कृतिक रक्षाक लेल सह-अस्तित्व आवश्यक: वक्तासभ

रोशनकुमार झा, जनकपुरधाम चैत २२, – एक जाति दोसर जातिक अस्तित्व स्वीकार करबाक मिथिलाक संस्कृतिक वैशिष्ठतामे अखन कमि आएल एक कार्यक्रमक वक्तासभ बतौलन्हि अछि।mm

ओ विगतमे जातीय अस्तित्वके एक दोसर सम्मान कएलाक कारण सौहार्दता बनल रहितो अखनुक समयक कटुता अस्तितवके स्वीकार नहि करबाक कारण उत्पन्न भेल बतौलन्हि ।मिथिला महोत्सवक दोसरदिन शनिदिन मिथिलाक संस्कृतिमे सह-अस्तित्वु विषयक विचार गोष्ठीमे वक्तासभ कथित उच्च वर्गक प्रभुत्वक कारण निम्न वर्गिय सभ मिथिला आ मैथिली अपन रहल कहय सँ हिच्किचा रहल कहलन्हि ।

ओ सभ सभवर्गक समाविशष्ठता नहि होवय धरि मिथिला आ मैथिली विकाश करय नहि सकबाक बतौलन्हि।विचार गोष्ठीक संयोजक हिमांशु चौधरीक अध्यक्षतामे भेल कार्यक्रमक प्रमुख अतिथि वरिष्ठ सहित्यकार प्रफुल कुमार िसंह मौनु एक दोसरक अस्तित्व स्विकार करबाक आवश्यकतापर जोड देलन्हि । कार्यक्रममे वरिष्ठ साहित्यकार डा. राजेन्द्र प्रसाद विमल तथा पत्रकार श्यामसुन्दर शशि कार्यपत्र प्रस्तुत कएलन्हि ।

हुनकसभक कार्यपत्रपर साहित्यकार तथा समीक्षकद्वय शीतल झा रोशन जनकपुरी टिप्पणी कएलन्हि । कार्यक्रममे वरिष्ठ पत्रकार रामभरोष कापडि भ्रमर राष्ट्रीय मानव अधिकार मानव अधिकार आयोग क्षेत्रीय कार्यलय जनकपुरक प्रमुखक प्रदीप झा मैथिली विभागाध्यक्ष डा.पशुपतिनाथ झा सत्यनारायण साह प्रा. सुरेन्द्र लाभ अशोक दत्त भोगेन्द्र झा व्यथित रामरत्न मिश्र सहितक उपस्थित रहथि।

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